नई दिल्ली /मूकसत्ता, मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने विधानसभा परिसर के अंदर उन दावो को नकार दिया जिसमें पूर्व की सरकार ने दावा किया था की यहाँ पर अंग्रेजो के समय फांसी घर हुआ करता था, जहाँ देश के स्वतंत्रता सेनानियों को सजा के तौर पर फांसी की सजा दी जाती थी इसके साथ ही उन्होंने कथित सुरंग को भी नकार दिया, विजेंद्र गुप्ता ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया की जहां डिलिब्रेशन होता है, वहां पार्लियामेंट होती है, जहां असेंबली होती है — उसी प्रांगण में "फांसीघर" कैसे हो सकता है? यह सवाल स्वाभाविक है.दूसरी बात कही गई कि इस परिसर में कोई सुरंग जाती है. उन्होंने दावा किया की हमने इस पर इतिहासकारों से बात की, तो उन्होंने बताया कि यह कोई सुरंग नहीं है, उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि असल में यह डक्टिंग है — वेंटिलेशन के लिए बनाई गई जगह,उस समय सीमित संसाधन थे, और जब इस तरह के भवन ज़मीन के नीचे बनाए जाते थे तो वेंटिलेशन के लिए डक्टिंग छोड़ी जाती थी। यह सिर्फ यहां नहीं, भारत की संसद में भी इसी तरह के स्थान बनाए गए हैं.अब बात उस स्थान की जिसे "फांसीघर" कहा गया — हमने देखा कि बाकायदा एक शिलापट्ट लगाया गया, जिसमें 9 अगस्त 1942 का उल्लेख है और उस दिन इसका उद्घाटन किया गया, यह कहते हुए कि यह एक दर्शनीय स्थल है और यहां फांसीघर हुआ करता था.जबकि सच ये है कि वहां कोई फांसीघर नहीं था और न है.जो कमरा बताया गया है, वह असल में टिफिन रूम है। उसमें जो लकड़ी की लिफ्ट है, उसे फांसी का फंदा और ट्रेप डोर बताया गया, जबकि वह भोजन आदि उठाने-ले जाने के लिए बनाई गई थी. उन्होंने कहा कि वर्तमान मे डिप्टी स्पीकर श्री मोहन सिंह बिष्ट का जो कमरा है, वह नक्शे में वायसराय रूम के नाम से दिखाया गया है.उसके आगे स्मोकिंग रूम है — उस समय धूम्रपान के लिए अलग कमरे बनाए जाते थे.इसी तरह मेंबर्स रूम हैं. उस समय सरकार में मंत्री नहीं होते थे, बल्कि मेंबर फाइनेंस, मेंबर एजुकेशन जैसे पद होते थे, उनके कमरे भी हैं. नक्शे पर हर कमरे के उपयोग का स्पष्ट उल्लेख है.जिस स्थान को आज फांसीघर कह कर पूर्व की सरकार में प्रचारित किया गया,वह कोई साधारण विषय नहीं है,वह इस पूरे परिसर की गरिमा से जुड़ा हुआ मामला है. उन्होंने पूर्व की केजरीवाल सरकार पर आरोप लगाया की जब इस स्थान पर एक शिलापट्ट लगाकर उसका उद्घाटन किया गया, तो यह विषय और भी गंभीर हो जाता है.मैं चाहता हूँ कि इस पर विपक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट करे।

Posted By: अशोक धवन